संताल परगना प्रक्षेत्र के आयुक्त संजय कुमार ने कमिश्नर कोर्ट में लंबित मामलों को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा है कि कोर्ट में सैकड़ों नहीं बल्कि हजारों मामले लंबित हैं, जिनमें वर्ष 1984 से जुड़े मामले भी शामिल हैं। दुमका आज तक से विशेष बातचीत में उन्होंने लंबित मामलों के निष्पादन और सेटलमेंट संबंधी विवादों पर विस्तार से अपनी बात रखी।
दुमका आज तक के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में संताल परगना के आयुक्त संजय कुमार ने कहा कि कमिश्नर कोर्ट में हजारों मामले लंबित हैं। उन्होंने बताया कि नियमित रूप से कोर्ट नहीं लग पाने के कारण कई मामलों का वर्षों से निष्पादन नहीं हो सका। इनमें कुछ मामले 1984 से भी लंबित हैं।

आयुक्त ने बताया कि पिछले मार्च से वे स्वयं कोर्ट की सुनवाई कर रहे हैं और अब तक लगभग 263 मामलों का निष्पादन किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि करीब 25 से 30 मामलों को डिफॉल्ट के आधार पर बंद किया गया, क्योंकि संबंधित पक्ष वर्षों से कोर्ट में उपस्थित नहीं हो रहे थे। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया कि निचली अदालतों के आदेश संताल परगना काश्तकारी अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप हों।

सेटलमेंट मामलों पर बोलते हुए आयुक्त ने बताया कि हाल ही में सेटलमेंट कार्यालय के निरीक्षण के दौरान यह जानकारी मिली कि करीब 600 मामलों का निष्पादन कर अंतिम अधिसूचना के लिए सरकार को भेजा गया था। हालांकि, कुछ मामलों में वन भूमि से जुड़े विवाद सामने आने के कारण प्रक्रिया में देरी हुई है।
जिलावार लंबित मामलों की स्थिति पर आयुक्त ने कहा कि देवघर और गोड्डा में ऐसे मामलों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है। वहीं दुमका में स्थानीय स्तर पर बड़ी संख्या में रिवीजन याचिकाएं दायर होने के कारण यहां भी मामलों का दबाव बना रहता है। दूसरी ओर जामताड़ा में ऐसे मामलों की संख्या काफी कम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में लंबित मामलों के निष्पादन में और तेजी लाई जाएगी।

फिलहाल प्रशासन की कोशिश वर्षों से लंबित मामलों को तेजी से निपटाने की है। अब देखना होगा कि इस अभियान से कमिश्नर कोर्ट में लंबित मामलों का बोझ कितना कम हो पाता है।

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