
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य आशा लकड़ा ने की प्रमंडलीय जनसुनवाई, कई मामलों का हुआ निष्पादन
दुमका। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य एवं भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय सचिव आशा लकड़ा संताल परगना प्रमंडल के दौरे पर दुमका पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने प्रमंडलीय जनसुनवाई में विभिन्न जिलों से आए मामलों की सुनवाई की। दो दिनों तक चली इस जनसुनवाई में संताल परगना के छह जिलों के लगभग 40 मामलों को सूचीबद्ध किया गया, जिनमें से पहले दिन करीब 20 मामलों की सुनवाई हुई।
आशा लकड़ा ने बताया कि पहले दिन सुने गए लगभग 20 मामलों में से 15 मामलों का निष्पादन किया गया। इनमें अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (SC/ST Act) से जुड़े मामले प्रमुख थे। लड़कियों के साथ छेड़छाड़, मारपीट और दुष्कर्म जैसे नौ मामलों में प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है, आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है तथा चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है।
उन्होंने कहा कि कई मामले सेवा संबंधी भी थे। एक मामले में वर्ष 2022 से 2024 तक एक कर्मी का भुगतान लंबित था, जिसे आयोग के नोटिस के बाद भुगतान कराया गया। भूमि विवाद से जुड़े मामलों की भी सुनवाई की गई। कई परिवारों के बीच वर्षों से चल रहे जमीन संबंधी विवादों का समाधान कराया गया और पात्र लोगों को आवास निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
आशा लकड़ा ने बताया कि साहिबगंज, दुमका, पाकुड़ और जामताड़ा जिलों के मामलों की सुनवाई पहले दिन की गई, जबकि दूसरे दिन देवघर और गोड्डा के मामलों पर विचार किया गया। उन्होंने कहा कि जामताड़ा से जुड़े कुछ मामलों में उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक उपस्थित नहीं हुए, जिसके कारण उन्हें समन जारी करने की अनुशंसा की गई है।
सामाजिक एवं सामुदायिक भूमि पर अवैध कब्जे के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय के जाहेरथान, गोचर भूमि तथा अन्य सामुदायिक भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा स्वीकार्य नहीं है। ऐसी भूमि संताल परगना टेनेंसी अधिनियम के अंतर्गत संरक्षित है और उस पर किए गए अतिक्रमण को हटाना होगा।
