झारखंड के दुमका जिले में वन विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एक भालू को अवैध कैद से मुक्त कराया है। शिकारीपाड़ा क्षेत्र में एक मदारी द्वारा भालू को नचाने और उसका प्रदर्शन करने की गुप्त सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने छापेमारी की। हालांकि आरोपी मौके से फरार हो गया, लेकिन भालू को सुरक्षित बरामद कर लिया गया है। यह मामला न केवल वन्यजीवों के संरक्षण से जुड़ा है, बल्कि देश में वन्यजीव अपराधों पर चिंता भी बढ़ाता है।
वन विभाग को सूचना मिली थी कि शिकारीपाड़ा क्षेत्र में एक मदारी भालू को बंधक बनाकर लोगों के सामने उसका प्रदर्शन कर रहा है। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। छापेमारी के दौरान एक भालू रस्सी से बंधा हुआ मिला। हालांकि वन विभाग के पहुंचने की भनक लगते ही आरोपी मदारी वहां से फरार हो गया।
वन विभाग के अधिकारियों ने भालू को अपने कब्जे में लेकर सुरक्षित रेस्क्यू किया है। फिलहाल उसका स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार कराया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार भालू को बाद में किसी मान्यता प्राप्त रेस्क्यू सेंटर या पुनर्वास केंद्र भेजा जाएगा, जहां उसकी समुचित देखभाल की जाएगी। दुमका के डीएफओ सात्विक व्यास ने बताया की शिकारीपाडा में मदारी द्वारा भालू नचाने की गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई की गई। मौके से भालू को सुरक्षित बरामद कर लिया गया है। आरोपी की तलाश जारी है। उसके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी.उन्होंने कहा की
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी पहले भी अन्य जिलों में भालू रखने और उसका अवैध प्रदर्शन करने के मामलों में संलिप्त रहा है। वन विभाग अन्य जिलों के अधिकारियों से संपर्क कर उसके आपराधिक रिकॉर्ड की जांच कर रहा है। कुछ स्थानीय लोगों द्वारा आरोपी को समर्थन दिए जाने की भी जानकारी मिली है, जिसकी जांच की जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार भालू को नचाना और उसे कैद में रखकर प्रदर्शन करना वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों पर सख्ती न केवल वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि वन्यजीव तस्करी और पशु क्रूरता जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए भी आवश्यक है।

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